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मेरा लेख सनातन धर्म तथा अनुयायियों को समर्पित

Posted On: 11 Jul, 2017 Others में

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राम का अर्थ क्या है? एक अर्थ है- ‘रमन्ते योगिन: यस्मिन् राम:।’ अर्थात् ‘राम’ ही मात्र एक ऐसे विषय हैं, जो योगियों की आध्यात्मिक-मानसिक भूख हैं, चैतन्य सत्ता। अत: राम का अर्थ नारायण भी होता है। ‘रति महीधर:’ सम्पूर्ण विश्व की सर्वश्रेष्ठ ज्योतित सत्ता है, जिनसे सभी ज्योतित सत्ताएं ज्योति प्राप्त करती हैं। ये है सनातन संस्कृति का आधार स्तंभ।
बाबरी मस्जिद विध्वंस निश्चित ही सही प्रतिउत्तर नहीं, लेकिन अपने सामाजिक ताने-बाने, अपनी आस्था के परमसत्य उस अवतार के प्रति अपनी असीम आस्था की अनदेखी भला कब तक रहती। जिसके नाम मात्र से सांसारिक मोहमाया से मोक्ष प्राप्ति हो जाती है।
अपने इष्ट, अपने आराध्य के प्रति निष्ठा और उनकी जन्मभूमि में एक प्रभु भवन का निर्माण हम परहित और विशेष समुदाय के हिसाब से करें। जिस समुदाय विशेष का गौरवशाली इतिहास सिर्फ सनातन संस्कृति को खंडित करके अस्तित्व में आया। यथार्थ सबको ज्ञात है।
आज आरोप सिद्ध हुए और एक तरफ कही न कहीं मुझ जैसे कई सनातन धर्म अनुयायियों की गरिमा और आस्था की डोर टूटी। एक प्रमुख अस्तित्व रखने वाले सर्व धाराओं को समाहित करने वाले, अप्रतिम और बेहद अतुलनीय समुदाय विशेष की भावना को निरंतर आहत करने के बाद, देश के संविधान पर इन्हें यकीन आया।
यही है इनकी कथित आधारशिला, जो इनके एक ग्रंथ में लिखित है। आज की विडंबना है कि जो सनातन संस्कृति और आस्था को आघात करेगा, वो धर्मनिरपेक्ष और अंत्योदय की भावना रखता है।
बेहद आहत हूं कि जिस धर्म पद्धति और उसके संस्कारों में मनुष्य का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित है, उसको खंडित करके विशेष समुदाय के लोग खुश होते हैं। मुझे शर्म आती है उन पर जो अपनी संस्कृति और आचरण भूल के सिर्फ स्वार्थ सिद्धि के लिए सनातन संस्कृति को खंडित कर रहे, निश्चित ही काल के भागी हैं।
ढकोसला है सब कि ये सताए हुए हैं। उत्तर से दक्षिण तक अतुल्य भारत के दर्शन सिर्फ सनातन संस्कृति के अवशेषों में होते हैं। अगर इसका एक प्रतिशत हिंदुत्व आक्रामक हुआ होता, तो मुगलकालीन भवन सिर्फ नाम मात्र शेष होते और यह है वास्तविक उदाहरण हमारे सहनशील होने का। शर्म है तुम पर।

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